Monday, 24 October 2016

दादा भाई नौरोजी

http://www.awgpstore.com/gallery/product/init?id=449स्वाधीनता के मंत्र- द्रष्टा- दादाभाई नौरोजी

नौरोजी पालन जी दोर्दी ने जिस समय संसार से विदा ली उस समय उनके एकमात्र पुत्र दादाभाई की आयु केवल चार वर्ष की थी। परिवार कि आर्थिक स्थिति अच्छी न थी ।। दादाभाई के पिता बंबई के खदक नामक स्थान में एक छोटे से मकान में रहते थे और पुरोहिताई करते थे।

यद्यपि पारसियों में विधवा- विवाह की व्यवस्था है तथापि दादाभाई की माता माणिकबाई ने पुनर्विवाह करना पसंद न किया ।। उन्होंने आजीवन वैधव्य में रहकर और अपने परिश्रम के बल पर अपनी एकमात्र संतान दादाभाई को लिखा- पढ़ा कर योग्य बनाने में ही जीवन की सार्थकता समझी ।। संतानवती होने पर भी सांसारिक- लिप्साओं के होकर, जो विधवायें के बंधन में फँस जाती हैं ।। और उनकी संतानों किन- किन कठिनाइयों और बंधनों में जीवन चलाना पड़ता है उससे वे अनभिज्ञ न थी ।। वे जानती थी कि पुनर्विवाह कर लेने पर उनके पुत्र दादाभाई का विकास रुक जायेगा, जो उन्हें किसी प्रकार सह्य न था ।। अपनी कतिपय दुर्बलताओं के लालच में अबोध संतान का जीवन बरबाद कर देना उनकी दृष्टि में महापातक था ।। इसलिए आजीवन विधवा रहकर उन्होंने अपने पुत्र को शिक्षा- दीक्षा के साथ एक सुयोग्य नागरिक बनाने का निश्चय कर लिया ।।

दादाभाई की माता भारतीय माता का एक जीता-जागता उदाहरण थी । यद्यपि उन्हें अक्षर-ज्ञान तक न था, तथापि के संस्कारों के अधीन वे शिक्षा के महत्त्व को न केवल ही थी उनमें पूर्ण विश्वास रखती थी । दादाभाई की शिक्षा के लिए जिस तप, त्याग और परिश्रम का परिचय दिया, उसे जानकर भारतीय माताओं के पावन आदर्श के प्रति मस्तक नत हुए बिना नही


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सागर के मोती

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बच्चों के चहुँमुखी विकास के लिए कहानियों की उपयोगिता सदा सेरही है । छोटी-छोटी कहानियाँ बच्चों में ज्ञान और नीतियों के बीजबोती हैं तथा बालकों को अच्छे-बुरे, अपने-पराए का बोध कहानियों के माध्यम से हो जाता है । बच्चों के व्यक्तित्व विकास एवं संस्कारों के बीजारोपण का सबसे सशक्त माध्यम कहानियों को माना जाता है । पहले ये कार्य दादी-नानी के द्वारा सहज होता रहता था, परंतु पाश्चात्य प्रभाव और समया भाव के कारण इस विधा की ओर लोगों ने ध्यान देना बंद कर दिया है। युग निर्माण योजना ने सचित्र बाल-कहानियाँ प्रकाशित कर बच्चों को भरपूर मनोरंजन, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा देने का कार्य अपने हाथ में लिया है । 

 

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संतो की बोध कथाएँ

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Saturday, 22 October 2016

मूल्यवान जीवन

http://www.awgpstore.com/gallery/product/init?id=70बच्चों के चहुँमुखी विकास के लिए कहानियों की उपयोगिता सदा सेरही है । छोटी-छोटी कहानियाँ बच्चों में ज्ञान और नीतियों के बीजबोती हैं तथा बालकों को अच्छे-बुरे, अपने-पराए का बोध कहानियों के माध्यम से हो जाता है । बच्चों के व्यक्तित्व विकास एवं संस्कारों के बीजारोपण का सबसे सशक्त माध्यम कहानियों को माना जाता है । पहले ये कार्य दादी-नानी के द्वारा सहज होता रहता था, परंतु पाश्चात्य प्रभाव और समयाभाव के कारण इस विधा की ओर लोगोंने ध्यान देना बंद कर दिया है । युग निर्माण योजना ने सचित्र बाल-कहानियाँ प्रकाशित कर बच्चों को भरपूर मनोरंजन, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा देने का कार्य अपने हाथ में लिया है ।


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बाल निर्माण की कहानियाँ-10


http://www.awgpstore.com/gallery/product/init?id=196बच्चों के मन में अध्यात्म एवं जीवन कला के विभिन्न सूत्र कथाओं के माध्यम से सरलता से स्थापित किये जा सकते हैं। इसी अवधि में मस्तिष्क का सर्वाधिक विकास होता है। भला-बुरा जो भी प्रभाव होता है, वे ग्रहण करते व तदनुसार अपना व्यक्तित्व विनिर्मित करते हैं। यह अभिभावकों व परिवार के संपर्क में आने वाले माध्यमों पर निर्भर है कि बालक-मन को वह किस प्रकार गढ़ते हैं। बाल निर्माण की कहानियों के भाग पिछले दिनों युग निर्माण योजना द्वारा प्रकाशित किए गए। प्रसन्नता की बात है कि विदेशी अथवा फूहड़ कॉमिक्स के सामने ये कहानियाँ सुरुचि, श्रेष्ठ ठहरी एवं परिजनों ने इन कथा पुस्तकों की भूरि-भूरि सराहना की। इनके कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। सोचा यह गया कि बालकों के लिए तो साहित्य लिखा गया और पसंद भी किया गया। उठती वय के किशोरों के लिए ऐसे साहित्य का सृजन अभी नहीं हुआ है। प्रस्तुत पुस्तक माला इसी श्रृंखला की अगली कड़ी है। इसमें मूलतः किशोरों की दृष्टि में रखते हुए कथा साहित्य रचा गया है। लेखिका ने बाल मनोविज्ञान का बड़ी गहराई से अध्ययन किया है, वही अध्ययन अनुभव इन कथानकों के रूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत हैं।


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कल्याण पथ

बच्चों के चहुँमुखी विकास के लिए कहानियों की उपयोगिता सदा सेरही है । छोटी-छोटी कहानियाँ बच्चों में ज्ञान और नीतियों के बीजबोती हैं तथा बालकों को अच्छे-बुरे, अपने-पराए का बोध कहानियों के माध्यम से हो जाता है । बच्चों के व्यक्तित्व विकास एवं संस्कारों के बीजारोपण का सबसे सशक्त माध्यम कहानियों को माना जाता है । पहले ये कार्य दादी-नानी के द्वारा सहज होता रहता था, परंतु पाश्चात्य प्रभाव और समया भाव के कारण इस विधा की ओर लोगों ने ध्यान देना बंद कर दिया है। युग निर्माण योजना ने सचित्र बाल-कहानियाँ प्रकाशित कर बच्चों को भरपूर मनोरंजन, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा देने का कार्य अपने हाथ में लिया है । 

 

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अमृत कण

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