Friday, 4 November 2016
ऋषि टाल्सटाय
"एक समय था जब मैं खुले शब्दों में कह दिया करता था कि हमारा
ईसाई धर्म बिल्कुल झूठ है। किन्तु आगे चलकर इसमें परिवर्तन हो गया। तब मैने
संदेह करने में तो कमी कर दी, किन्तु मुझे इस बात का पक्का विश्वास हो
गया, जिस धर्म को हम मान रहे हैं, उसमें पूरी सच्चाई नहीं है। साधारण
मनुष्यों द्वारा माने जाने वाले धर्म में तो वास्तविकता थी, क्योंकि इसमें
लेशमात्र संदेह नहीं कि सच्चाई के बिना जीवित रहना असम्भव है। यह सच्चाई
मुझे मालूम थी और मैं उसी के अनुसार चलाता था। पर इस सच्चाई के साथ भी झूठ
मिला हुआ था। यह ठीक है कि साधारण लोगों के विचारों में पादरी लोगों
(पंडा-पुरोहित) की अपेक्षा अधिक सच्चाई थी, किन्तु वह असत्य से सर्वथा
मुक्त न थे।"
जब धर्म की नींव कमजोर पड़ जाती है और उसका सार-तत्व निकल जाता है, तो मनुष्य का चरित्र भी कायम नहीं रह सकता। ऐसा होने पर भी कुछ लोग तो "धर्म" का नाम लेते रहते हैं और थोड़ा-बहुत दिखावा भी कर देते हैं और कुछ लोग बड़ी शान के साथ अपने को ऐसी "बेवकूफ़ी" की बातों से अलग बतलाने लगते हैं और प्राय: धर्म का मज़ाक उड़ाया करते हैं। इन दोनों ही प्रकार के लोगों का चारित्रिक और नैतिक पतन अनिवार्य होता है। उनकी दृष्टि में खाना, कमाना, भोग करना ही मनुष्य-जीवन का सार रह जाता है और उसी की पूर्ति में वे सदा लगे रहते हैं। इस सम्बन्ध में टाल्सटाय के अनुभव वास्तव में बड़े करुणा-जनक और हृदय-द्रावक हैं। उनका वर्णन करने में उन्होंने जिस स्पष्टता और साहस का परिचय दिया है, वह अद्वितीय है। वे जन्म से ही एक बहुत प्रतिष्ठित और राजवंश से संबन्धित घराने से थे और बाद में भी अपने उद्योग तथा त्याग और तप से जगत्-पूज्य बन गये।. .
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आदर्शो की बलिवेदी पर जीवन चढाना सीखें भाग-१
अपनी संस्कृति में मनुष्य के दीर्घायुष्य की कामना करने का विधान
है । दीर्घायुष्य की यह कामना किसलिए ? क्या केवल इसलिए कि मनुष्य सारा
जीवन सांसारिक सुखोपभोग करता रहे और एक दिन राम नाम सत्य हो जाय ? नहीं,
कदापि नहीं । भारतीय संस्कृति की आधारशिला भोगवाद नहीं अपितु कर्मवाद है ।
त्याग, तप, लोक संग्रह और लोक मंगल इस आधारशिला के चार सुदृढ़ स्तम्भ हैं ।
मनुष्य इस धरती का दोहन करने नहीं वरन् इसे जीवन के उच्चतम मूल्यों से
सुसज्जित करने, सुषमामय बनाने के लिए जन्मा है । ऐसा मूल्य समन्वित,
त्याग-तप-लोक संग्रह और लोक मंगल प्रेरित कर्मनिष्ठ जीवन मनुष्य
जिए-दीर्घायुष्य की कामना में अन्तनिर्हित यही भावना है ।
आयु का विस्तार दीर्घ हो अथवा अल्प, काम्य दीर्घता अथवा अल्पता नहीं है, काम्य जीवन की सार्थकता है । जीवन की सार्थकता की उपलब्धि यदि मृत्यु के शीघ्र वरण से होती है तो वही वरणीय है । ऐसा ही जीवन स्पृहणीय है, अनुकरणीय है, श्लाघ्नीय है । वह जीवन नहीं जो दीर्घ होते हुए भी केवल पृथ्वी का भार बना हुआ है, जिसके बोझ से धरती माता धँसी-पिसी जा रही है । इसी सत्य का बोध कराने और केवल बोध ही नहीं अपितु जीवन में उसे उतारने, तदनुरूप जीवन ढालने के लिए ही इस संकलन में ऐसे महावीरों के जीवन की झाँकी दिखलाई गई है जिनको अपने अंक से लगाकर मृत्यु भी धन्य हो गई ।
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आदर्श कहानियां
बच्चों के चहुँमुखी विकास के लिए कहानियों की उपयोगिता सदा सेरही
है । छोटी-छोटी कहानियाँ बच्चों में ज्ञान और नीतियों के बीजबोती हैं तथा
बालकों को अच्छे-बुरे, अपने-पराए का बोध कहानियों के माध्यम से हो जाता है ।
बच्चों के व्यक्तित्व विकास एवं संस्कारों के बीजारोपण का सबसे सशक्त
माध्यम कहानियों को माना जाता है । पहले ये कार्य दादी-नानी के द्वारा सहज
होता रहता था, परंतु पाश्चात्य प्रभाव और समया भाव के कारण इस विधा की ओर
लोगों ने ध्यान देना बंद कर दिया है। युग निर्माण योजना ने सचित्र
बाल-कहानियाँ प्रकाशित कर बच्चों को भरपूर मनोरंजन, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा
देने का कार्य अपने हाथ में लिया है ।
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अब्राहम लिंकन
अमेरिका आज संसार में धन और शक्ति की दृष्टि से सर्वोपरि माना
जाता है। संसार कं अधिकांश राष्ट्र उसके कर्जदार और सबसे अधिक सैन्य-
साम्रगी उसके ही पास है। पर इतनी समृद्धि और सामर्थ्य होने पर भी वहीं
सामाजिक शांति का बड़ा अभाव है। लूटमार, अपहरण, हत्या, आत्महत्या की जितनी
घटनायें वहीं होती हैं, उतनी शायद ही किसी अन्य देश ने होती होंगी। सब
प्रकार के साधन होते हुए भी इस तरह का अशांत, असंतुष्ट -जीवन व्यतीत करना,
इस बात का चिह्न है कि वहीं के समाज में कोई ऐसी बड़ी त्रुटि है, जिससे वे
वास्तविक सुख से वंचित ही रह जाते है।
न मालूम वह कौन -सी अशुभ घड़ी थी, जब धन के लोनी कुछ नर- पिशाचों ने अफ्रीका कं निरीह हबशियों को जबर्दस्ती पकड़कर गुलाम के रूप में अमेरिका में बेचना शुरू जिया ।। उस समय अमेरिका की आबादी कम थी। जमीन जितनी चाहे पडी़ हुई थी बस वहाँ वहीं के गोरी ने इन काले लोगों से पशुओं की तरह काम लेकर अपने वैभव की वृद्धि करनी आरंभ की। वे लोग हबशियों को मनुष्य नहीं समझते थे और उसके साथ कैसा भी व्यवहार कर सकते थे। हबशी दास को मार डालने पर भी कोई कानूनों प्रतिबंध न था और वास्तव में प्रति वर्ष सैकड़ों दास अधिक क्रुर प्रकृति के मालिकों द्वारा मार दिये जाते थे। हबशियों की संतान, स्त्री, बच्चे सब मालिक की अचल संपत्ति की तरह माने जाते थे और उनको पीढ़ी- दर एक ही मालिक की दासता करनी पड़ती थी जब तक यह स्वयं उसे किसी दूसरे के हाथ बेच न दे। अगर भीषण कष्टों को सहन न कर सकने के कारण कोई दास भाग जाता, तो जानवरों की तरह उसका पीछा और खोज की जाती थी और उसे पकड़कर पहले से अधिक यंत्रणायें दी जाती थी।
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Thursday, 3 November 2016
Wealth Of Knowledge
Stories have always been very useful for overall development
of children. Short Stories sow the seeds of knowledge and moral ideas in
their mind. Through these stories children learn to differentiate
between good and bad, friend and foe. Stories are considered to be most
effective medium for personality development of children and for giving
them good sanskars. Previously, grandmothers (dadi & nani) used to
tell inspiring stories to children. But these days this important art is
being neglected. Yug Nirman Yojna has published Picture Books
containing short stories which will entertain, guide and inspire the
children and elders both.
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Stories Of Saints
Stories have always been very useful for overall development
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their mind. Through these stories children learn to differentiate
between good and bad, friend and foe. Stories are considered to be most
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